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    तो ये है मां के हाथ से बने खाने के टेस्टी होने का राज

    मां के हाथ से बने खाने के आगे फाइव स्टार और अच्छे-अच्छे रेस्टोरेंट का खाना भी फीका होता है, चाहे कोई कितनी भी कोशिश कर लें वैसा स्वाद नहीं मिल पाता जैसा मां के हाथ से बने खाने में होता है. लेकिन क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है कि आखिर मां के हाथों का बना खाना इतना टेस्टी क्यों होता है? आखिर क्यों मां के हाथ से बने राजमा चावल या फिर गाजर के हलवे जैसा स्वाद कहीं और नहीं मिलता.
    इन रेसिपीज पर है मां के हाथ के स्वाद का कॉपीराइट...

    दरअसल, इस पर रिसर्च किया गया और जिसमें यह पता चला कि जो खाना प्यार से और मन से पकाया जाता है वह ज्यादा टेस्टी होता है. रिसर्चर्स का कहना है कि मां के हाथ का खाना स्वादिष्ट इसलिए होता है क्योंकि इसके पीछे इमोशनल परसेप्शन होता है. रिसर्च रिपोर्ट की मानें तो जिस भी खाने को प्यार और खुशी के साथ पूरा वक्त देकर, और इसके अलावा जिसके लिए बनाया जा रहा है दिमाग में उसका ख्याल रखकर बनाया जाए तो स्वादिष्ट लगेगा ही.

    ब्रिटेन के साइकोलॉजिस्ट क्रिस्टी फरगसन के मुताबिक, कई रिसर्च के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि जो चीजें प्यार और लगन से बनाई जाती हैं वो अधिक स्वाद वाली होती हैं. लेकिन जो शख्स खाना बना रहा है उसकी नीयत अच्छी होनी चाहिए. खाना बनाते वक्त उसका मूड कैसा है, ये भी काफी महत्वपूर्ण होता है. इसके बाद हमने पाया कि कोई मां जब भी खाना बनाती है वो बड़े प्यार और सच्चे मन से बनाती है. इसलिए उसके हाथों से बने खाने का स्वाद और कहीं मिल सकता.

    भाईजान मां के हाथ की दाल और बिरयानी के बिना रह नहीं सकते

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