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बसंत पंचमी पर क्यों बनाए जाते हैं पीले रंग के पकवान?

व्रत-त्‍योहार

इस साल 2021 में बसंत पंचमी का पर्व कल यानी 16 फरवरी को है. भारत में मनाए जाने वाले हर त्योहार का अपना अलग महत्व होता है. इस दिन विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती माता की पूजा अर्चना की जाती है. बंगाल, बिहार में हर स्कूल, कॉलेज में माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा होती है. पीला रंग इस उत्सव के लि

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🍳 विधि

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    इस साल 2021 में बसंत पंचमी का पर्व कल यानी 16 फरवरी को है. भारत में मनाए जाने वाले हर त्योहार का अपना अलग महत्व होता है. इस दिन विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती माता की पूजा अर्चना की जाती है. बंगाल, बिहार में हर स्कूल, कॉलेज में माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा होती है. इस दिन खासकर युवा लड़कियां चमकीले पीले रंग के कपड़े पहनकर त्योहार मनाती हैं. पीला रंग इस उत्सव के लिए एक विशेष अर्थ रखता है क्योंकि यह प्रकृति की प्रतिभा और जीवन की जीवंतता का प्रतीक माना जाता है.
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    बसंत पंचमी के मौके पर लोग न केवल पीले रंग के कपड़े पहनते हैं बल्कि देवी-देवताओं और दूसरों को पीले रंग के फूल भी देते हैं. वहीं इस त्योहार में एक विशेष प्रकार की केसर हलवा नामक मिठाई को आटा, चीनी , मेवे और इलायची पाउडर से बनाते हैं.
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    बेर और सांग्री मुख्य प्रसाद
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    इस दिन बेर और सांग्री मुख्य प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं. बेर उत्तर और मध्य भारत में बहुत पाया जाता है. सान्ग्री वे बीन्स होते हैं जो मूली के बीज लिए हुए होते हैं. इन दोनों चीजों को एक थाली में पीली बर्फी या लड्डू, पान, नारियल और सरसों के कुछ पत्तों के साथ रखा जाता है. एक दूसरी थाली भी पूजा की सामग्रियों के साथ, जैसे पानी, सिंदूर और पीले फूल, के साथ तैयार की जाती है. घर की स्त्री ही एक जरी और गोटेवाली पीली पोशाक के साथ दोनों हाथों में पीली और लाल चूड़ियां पहनकर पूजा करती हैं और तब उत्सव शुरू होता है.
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    खान-पान का भी है महत्व
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    पूजा-पाठ और माता को अंजलि अर्पित करने के बाद एक महत्वपूर्ण हिस्सा भोज का होता है. गृहिणियां गरम चूल्हों पर कुछ ऐसे स्वादिष्ट पकवान बनाती हैं जो कुछ सबसे अधिक मांगों और स्वाद वाले होते हैं. बसंत पंचमी में पीला रंग प्रमुख होता है क्योंकि लोग केवल पीले रंग के कपड़े ही नहीं पहनते हैं बल्कि देवी को चढ़ाने के लिए बनने वाला भोजन भी पीले रंग का होता है.
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    कुछ पारंपरिक घरों में पीले रंग की मिठाइयों का रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच लेन-देन भी होता है. उत्तर भारत के पसंदीदा हैं केसरी हलवा और मीठे चावल. जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश में मालपुआ बनाया जाता है. वहीं मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में बूंदी के लड्डू, खिचड़ी का प्रसाद ज्ञान की देवी को चढ़ाया जाता है. मिठाइयों को पीला बनाने के लिए उनमें चुटकीभर केसर डाला जाता है.
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    बंगाल, असम और बिहार में प्रसाद के तौर पर खिचड़ी, लाबड़ा, चटनी और खीर भी सब को खिलाई जाती है.
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