क्यों बनाई जाती है शरद पूर्णिमा में खीर, क्या हैं खाने के फायदे
आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा पूरी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और
इससे अमृत बरसता है जो सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन खीर बनाई जाती है. इसे एक कटोरी में एक पतले
सूती कपड़े से ढक्कर चंद्रमा की रोशनी में रख
🍳 विधि
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आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इस दिन रात में जागने की परंपरा है और इसी वजह से इसे जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है. कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा पूरी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और इससे अमृत बरसता है जो सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है.
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मान्यताओं के अनुसार इस दिन खीर बनाई जाती है. इसे एक कटोरी में एक पतले सूती कपड़े से ढक्कर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है. आइए हम आपको बताते हैं क्या हैं इस खीर के खाने के फायदे.
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चंद्रमा की रोशनी में रखी गई खीर खाने से शरीर और मन दोनों को शीतलता मिलती है.
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इस खीर को खाना स्वास्थ्यवर्धक भी बहुत माना जाता है.
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चंद्रमा की चांदनी में रखी गई खीर का अगले दिन नहा धोकर देवों को भोग लगाने से और इसे प्रसाद के तौर पर पूरे परिवार में बांटकर खाने से रोगों से छुटकारा मिलता है.
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खीर के सेवन की मान्यता से उम्र लंबी होने की सोच भी जुड़ी है.
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कहते हैं कि इस दिन सांस और कफ से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं.
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अब जानिए क्या कहता है विज्ञान:
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वैज्ञानिक दृष्टि से शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत गुणकारी मानी जाती है. इस दिन चंद्रमा धरती के बहुत समीप होता है और इस वजह से इसकी किरणें सीधे धरती तक पहुंचती हैं. इस खास दिन चन्द्रमा की किरणों में खास तरह के विटामिन आ जाते हैं जिससे इसकी रोशनी में रखी गई खीर और भी ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक बन जाती है.
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