कहीं आप भी प्लास्टिक के चावल तो नहीं खा रहे?
🍳 विधि
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चावल भारत के कई राज्य जैसे बंगाल, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और साउथ का मुख्य आहार है. चावल-दाल के बिना तो लोगों का पेट ही नहीं भरता. चाहे राजमा राइस हो, कढ़ी चावल या फिर पुलाव. सबमें चावल की अहम भूमिका है. अगर आपको भी बिना चावल खाए खाने का बोध नहीं होता और इसे खाने को लेकर आपका जी मचल जाता है तो अब जरा सावधान हो जाइए. कहीं आपका यह चावल का मोह आपको जहर खाने पर मजबूर तो नहीं कर रहा है. जी हां, आजकल चावल के नाम पर आर्टिफिशियल यानि प्लास्टिक चावल मार्केट में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है जो सेहत के लिए हानिकारक है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं.
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प्लास्टिक चावल की अलग से पहचान करना तो आसान है पर अगर इसे शुद्ध चावल के साथ मिला दिया जाए तो इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाती है. प्लास्टिक चावल आलू, शलगम, प्लास्टिक और रेक्सिन मिलाकर बनाया जाता है जिसे हमारा शरीर पचा नहीं पाता है और तबीयत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
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ऐसे करें असली और नकली (प्लास्टिक) चावल के बीच का फर्क.
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प्लास्टिक के चावल से खुशबू नहीं आएगी. (चावल कैसे बनाएं)
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पकाने के बाद प्लास्टिक चावल से प्लास्टिक की महक आ जाएगी.
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असली चावल पकाने के बाद आसानी से दब जाता है जबकि नकली चावल का दाना पकने पर भी टाइट रहता है.
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असली चावल की अपेक्षा नकली चावल जल्दी नहीं टूटता. (अगर चावल जल गए हैं तो फेंके नहीं...)
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जब भी मार्केट से ज्यादा मात्रा में चावल लाएं तो एक मुट्ठी चावल को तवे पर गर्म करके देख लें. इसमें प्लास्टिक के चावल पिघलने लगेंगे. जबकि शुद्ध चावल भुनकर कड़क हो जाएंगे. (बचे चावल से बनाएं रसमलाई )- आप चाहें तो पहले थोड़े से चावल बनाकर इसके असली और नकली की पहचान कर लें.
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