पीजिए तुलसी का काढ़ा, मिलेंगे फायदे ही फायदे
तुलसी के पत्ते, इसके रस और इसकी चाय को सही तरीके से इस्तेमाल में लाया जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है.
🍳 विधि
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तुलसी के पत्ते, इसके रस और इसकी चाय को सही तरीके से इस्तेमाल में लाया
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जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है.
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तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए सामग्री
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तुलसी की 10-12 पत्तियां
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आधी लेमन ग्रास (हरे चाय की पत्ती)
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एक इंच अदरक का टुकड़ा (कद्दूकस कर लें)
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पानी 4 कप
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गुड़ 3 चम्मच या तीन छोटी डली
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बनाने की विधि
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सबसे पहले तुलसी की पत्तियों और लेमनग्रास को अच्छी तरह धो लें.
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एक पैन में पानी डालकर मीडियम आंच पर उबलने के लिए रखें. - जब हलका गरम हो जाए तो इसमें तुलसी की पत्तियां, लेमन ग्रास और अदरक डालकर 4-5 मिनट तक उबालें.
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इसके बाद इसमें गुड़ डालकर आंच बंद कर दें. काढ़े को चम्मच से चलाते रहें ताकि गुड़ घुल जाए.
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2 मिनट तक ठंडा होने के बाद कप में छानकर गर्मागर्म पीएं.
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आप चाहें तो तुलसी के काढ़े के में 2-3 कालीमिर्च भी डाल सकते हैं.
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अगर फ्लेवर चाहिए तो इसमें एक इलायची भी कूटकर डाल दें.
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लेमन ग्रास न मिले तो कोई बात नहीं. बिना इसके भी तुलसी का काढ़ा बना सकते हैं.
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तुलसी का काढ़ा और इसकी पत्तियों के रस के फायदे
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बदलते मौसम की वजह से होने वाले सर्दी, जुकाम और गले में खराश से छुटकारा दिलाने में सबसे बढ़िया काम करता है यह तुलसी का काढ़ा.
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तुलसी के पत्ते के काढ़े में चुटकीभर सेंधा नमक मिलाकर पीने से फ्लू रोग जल्दी ठीक हो सकता है. वहीं हर्बल जानकार फ्लू के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं.
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पथरी निकालने में सबसे बेहतर है यह तुलसी का काढ़ा. यदि इस काढ़े में रोजाना एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित 6 महीने तक सेवन किया जाए तो पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल सकती है.
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देश के आदिवासी बहुल्य इलाकों में पानी को शुद्ध करने के लिए तुलसी के पत्ते का इस्तेमा बहुतायत में होता है. बर्तन में पानी भरकर इसमें तुलसी की पत्तियां डालकर एक-दो घंटे तक रख दिया जाता है. बाद में इसे छानकर पीया जाता है.
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बरसात और सर्दी के मौसम में त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है. ऐसे में तुलसी की पत्तियों को त्वचा पर रगड़ने से संक्रमण खत्म हो सकता है. तुलसी में पाया जाने थाइमोल त्वचा रोगों में काफी राहत देता है.
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जिन लोगों को दिल की बीमारी होती है उन्हें तुलसी का सेवन जरूर करना चाहिए. यह कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करती है. हार्ट अटैक के मरीजों को रोजाना तुलसी के रस का सेवन करना चाहिए. तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित रहती है.
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चेहरे की चमक और रंगत बनाए रखने में तुलसी से बढ़िया कोई क्रीम नहीं हो सकती. तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाकर रात को चेहरे पर लगाने से झाइयां खत्म हो जाती हैं. साथ ही चेहरे पर होने वाली फुंसियां भी खत्म हो जाती हैं.
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इसके नियमित सेवन से 'क्रोनिक-माइग्रेन' के निवारण में मदद मिलती है. प्रतिदिन में 4-5 बार तुलसी की 6-7 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने सकता है.
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ऐसा माना जाता है कि आदिवासी लोग शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाते हैं इससे उस महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है.
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संतरे के छिलकों को सुखाकर पाउडर बना लें. फिर इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाब जल मिलाकर शरीर पर लगाने से घमौरियों से तुरंत आराम मिल सकता है.
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