क्या है कार्तिक पूर्णिमा का महत्व, क्यों करते हैं गंगा स्नान?
देशभर में कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मानाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूरा महीना भगवान विष्णु को प्रिय होता है. इस दिन गंगा स्नान करने का बड़ा महत्व है. ऐसा माना
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विधि
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व
इस दिन तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं का तांता-सा लग जाता है. जहां भी कुंभ होता है वहां श्रद्धालूगण गंगा स्नान करने के लिए जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से बुरे कर्मों से मुक्ति मिलती है और काया निरोगी होती है.
कहा जाता है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीप दान करने से पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है. इसलिए लोग गंगा को दीपदान करते हैं.
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
- कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए. अगर गंगा स्नान करने नहीं जा सकते तो अपने घर पर ही पानी में गंगा जल छिड़कर स्नान कर सकते हैं.
- इस दिन गाय दान, दूध दान, फल का दान, आंवला दान आदि करना शुभ माना जाता है.
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें.
- इस दिन ब्राह्मण व दीन-दुखियों को भोजन कराना और दक्षिणा देने का भी विधान है.
- इस दिन तुलसी की पूजा होती है. इसलिए तुलसी की पत्तियों को न तोड़ें.
- इस दिन मांस-मछली, शराब आदि का सेवन करने से बचें. ऐसा करने से पाप लगता है. ऐसा माना जाता है.
- इस दिन पानी में शहद और दूध मिलाकर पीपल के पेड़ पर अवश्य चढ़ाएं.
सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व सिख धर्म में भी बहुत है. माना जाता है कि इस दिन सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था. इस दिवस को सिख धर्म में प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. इसे गुरु नानक जयंती भी कहते हैं. गुरु नानक जयंती पर गुरुद्वारों में खास पाठ का आयोजन होता है. सुबह से शाम तक शबद कीर्तन चलता है और गुरुद्वारों के साथ ही घरों में भी खूब रोशनी की जाती है. इसके अलावा, लंगर छकने के लिए भी भीड़ उमड़ती है.
कार्तिक पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त
कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 को मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर 2020 रात 12:49 मिनट से आरंभ होकर 30 नवंबर की दोपहर 3 बजे तक रहेगी. पूरे दिन गंगा स्नान और भगवान विष्णु की पूजा-कथा की जाएगी.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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