कहीं पान तो कहीं मांस, विजयादशमी पर ऐसी हैं खान-पान की परंपराएं

कहीं पान तो कहीं मांस, विजयादशमी पर ऐसी हैं खान-पान की परंपराएं

विजयादशमी नवरात्र के बाद मनाया जाता है. इस दिन असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव लोग मनाते हैं. दशहरे पर रावण का पुतला जगह-जगह जलाया जाता है. इससे पहले नौ दिनों तक लोग मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों क

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विजयादशमी नवरात्र के बाद मनाया जाता है. इस दिन असत्य पर सत्य की जीत का उत्सव लोग मनाते हैं. दशहरे पर रावण का पुतला जगह-जगह जलाया जाता है. इससे पहले नौ दिनों तक लोग मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं व्रत रखते हैं और खान-पान का विशेष ध्यान रखते हैं. इस दौरान कई समुदाय के लोग मांस-मदिरा का सेवन नहीं करते हैं, लेकिन ऐसे कई समुदाय हैं जहां पर खासतौर पर मांस का सेवन किया जाता है. कहीं-कहीं तो देवी दुर्गा की पूजा के लिए पशु बलि दी जाती है.

बंगाली समुदाय में नहीं है कोई पाबंदी
बंगाली समुदाय षष्ठी से दुर्गा पूजा करते हैं. इस दौरान वे किसी प्रकार के खान-पान की पाबंदी नहीं लगाते हैं. उनका मानना है कि दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा अपने बच्‍चों के साथ अपने मातृ ग्रह में कुछ दिन गुजारने आती हैं. बंगाली देवी दुर्गा को अपने परिवार का ही हिस्‍सा मानते हैं. इसलिए वो इस दिन मांस, मछली और मिठाई बनाते हैं और अपने परिवार के सदस्‍य को उनकी पसंदीदा चीज खिलाना चाहते हैं. इसलिए जो भी चीजें बनाते हैं उन्हें मां दुर्गा को भी अर्पित करते हैं. हालांकि इस मौके विवाहित महिलाएं मछली या नॉनवेज खा सकती हैं, लेकिन बंगाली ब्राम्हण विधवा स्‍त्री को पारंपरिक सात्‍विक भोजन ही दिया जाता है.

हिमालयन जनजाति के लोग भी खाते हैं मांस-मदिरा
ऐसा नहीं है कि नवरात्र में सिर्फ बंगाली लोग ही मांस-मछली का सेवन करते हैं बल्कि देश में कई राज्‍यों में ब्राम्हण भी नॉनवेज खाते हैं. लोक कथाओं की मानें तो वैदिक काल में हिमालयन जनजाति और हिमालय के आसपास रहने वाले समुदाय के लोग देवी की पूजा आराधना करते थे. उन लोगों का मानना था कि दुर्गा और चांडिका शराब और मांस शौक था. इसलिए वो भी इन दिनों पशुबलि देते हैं.

उत्तराखंड में दी जाती है भैंसे की बलि
नवरात्र में उत्‍तराखंड में ब्राह्मण लोग अपनी कुल देवी के सम्‍मान में भैंसे की बलि देकर उन्‍हें प्रसन्‍न करते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था महिष का अर्थ भैंस होता है. पशु मांस को पकाकर अपने ही समुदाय के लोगों में प्रसाद बांटने की भी परंपरा है.

राजस्थान के कई इलाकों में है शराब और बकरे की बलि की परंपरा
राजस्‍थान के कई इलाकों में शक्ति की आराधना करने वाले शाक्‍त सम्‍प्रदाय के लोग भी इन दिनों बकरे की बलि और शराब चढ़ाने की मान्‍यता को मानते हैं.

छत्तीसगढ़ में इस देवी को दी जाती है 12 महीने बलि
इसी तरह छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कुछ जगहों पर देवी मां से मन्नत पूरी करवाने के लिए उन्हें बकरे की बलि दी जाती है. छत्तीसगढ़ में कुदरगढ़ी देवी को 12 महीने बलि दी जाती है. जबकि मध्यप्रदेश में नवमी के दिन बकरे की बलि देकर देवी को प्रसन्न किया जाता है. बस्तर में अश्विन अष्टमी की आधी रात अनुपमा चौक के समीप निशा जात्रा मंदिर में 11 बकरों की बलि दी जाती है.

कुछ ऐसी ही मान्यताएं अलग-अलग राज्यों के लोग मानते हैं. जिसमें वो मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए पशुबलि देते हैं और मदिरा का प्रसाद चढ़ाते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसी भी परंपराएं हैं जो अपने आप में अनोखी हैं.

दशहरे के दिन कहीं बूंदी तो कहीं जलेबी खाने का रिवाज है. जलेबी खाने के पीछे मान्यता है कि राम को शश्कुली नामक मिठाई बहुत पसंद थी. जिसे आजकल जलेबी के नाम से जाना जाता है. इसलिए रावण पर विजय के बाद जलेबी खाकर खुशी मनाई जाती है.

उत्तरप्रदेश में खाया जाता है पान
वहीं उत्तरप्रदेश में दशहरे के दिन पान खाने का रिवाज है. पान को प्रेम और जीत का प्रतीक माना जाता है. साथ ही बीड़ा शब्द का भी अपना विशेष महत्व है, जिसे कर्तव्य के रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि दशहरे पर रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाया जाता है. दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं, लेकिन इस बीड़े को रावण दहन से पूर्व हनुमान जी को चढ़ाया जाता है, जिससे उनका आर्शि‍वाद मिल सके. पान खाने को मौसम से भी जोड़कर देखा जाता है. शारदीय नवरात्र में मौसम में बदलाव होता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में पान सेहत के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है. नौ दिन के व्रत के बाद पान खाने से भोजन पचाने में आसानी होती है.

नीम की पत्तियां खाने का है रिवाज
वहीं कहीं-कहीं नीमपत्ती भी खायी जाती है. इसे दाह संस्कार से जोड़कर देखा जाता है. हिंदू धर्म में शव का दाह-संस्कार करने के बाद स्नान के बाद खिचड़ी खिलाने का रिवाज है. जिसे रावण के पुतले के दहन के बाद नीम पत्ती खाकर निभाया जाता है.

 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कहीं पान तो कहीं मांस, विजयादशमी पर ऐसी हैं खान-पान की परंपराएं एक लोकप्रिय फूड न्‍यूज़ रेसिपी है, जिसे कहीं पान तो कहीं मांस, विजयादशमी पर ऐसी हैं खान-पान की परंपराएं और स्वादिष्ट मसालों की मदद से तैयार किया जाता है। यह भारतीय खाने का एक पसंदीदा व्यंजन माना जाता है।

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