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    ये है चॉकलेट के बनने की कहानी, कभी तीखा था इसका स्वाद

    चॉकलेट खाना हर किसी की पसंद होती है. इसका नाम सुनते ही मानो मुंह में पानी आ जाता है. बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी को चॉकलेट खाना बहुत पसंद होता है. पर क्या कभी आपने सोचा है कि सबसे पहले चॉकलेट बनी कहां थी, क्या है इसका इतिहास. आइए हम बताते हैं आपको.

    चॉकलेट का इतिहास लगभग 4000 साल पुराना है. कई लोग ऐसा मानते थे कि चॉकलेट वाला कोको का पेड़ अमेरिका के जंगलों में पाया जाता है. कहा जाता था कि चॉकलेट की शुरुआत मैक्‍सिको और मध्‍य अमेरिका के लोगों ने की थी. 1528 में स्‍पेन के राजा मैक्‍सिको को अपने कब्‍जे में कर वापिस स्‍पेन आते समय कोको के बीज लाए थे. वहां के लोगों को ये चीज बहुत पसंद आई थी और तभी से ये अमीर लोगों का पसंदीदा पेय बन गया था.


    पर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चॉकलेट हमेशा से मीठी नहीं थी बल्कि इसका स्‍वाद तीखा था और लोगों को इसका यह स्वाद पसंद भी था. अमेरिका के लोग इसे बनाने के लिए कोको के बीजों को पीसकर इसमें कुछ मसाले और मिर्च मिलाते थे और इसी वजह से इसका स्वाद तीखा होता था.  कई सालों तक तो ऐसा ही चलता रहा, पर काफी समय बाद इस पेय की नई रेसिपी निकाली गई जिसका नाम रखा गया कैडबरी मिल्‍क चॉकलेट. कुछ इस तरह हुआ था चॉकलेट का आविष्‍कार.

    इसके बाद धीरे-धीरे इसमें पानी, वनीला, शहद आदि मिलाकर इसे कई अलग-अलह स्वाद दिया जाने लगा. लेकिन इसकी असली मिठास तो यूरोप पहुंचकर ही आई. स्‍पेन का खोजी हर्नेन्‍डो कोर्टेस एज्‍टेक के राजा मान्‍तेजुमा के दरबार में पहुंचा था जहां उसने पहली बार चॉकलेट पेश की थी. वहां इसके कड़वे स्‍वाद की वजह से सभी ने इसे सूअरों का पेय बताया था.


    सन् 1828 में डच केमिस्‍ट कॉनराड जोहान्‍स वान हॉटन ने कोको प्रेस का आविष्‍कार किया और मशीन की मदद से कोको बीज से कोको बटर को अलग किया गया और इसके पाउडर से चॉकलेट बनी. इसके बाद सन्  1848 में ब्रिटिश चॉकलेट कंपनी जे.एस फ्राई एंड संस ने पहली बार कोको लिकर में कोको बटर और चीनी मिलाकर इसे खाने लायक चॉकलेट बनाया.
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