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    कितना सही है व्रत में चाय-कॉफी पीना?

    व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है. बल्कि ऐसी चीजों का सेवन किया जाता है जो अन्न की श्रेणी में नहीं आती हैं. कुछ लोग निर्जला उपवास रखते हैं. तो कुछ महज अनाज न खाने का व्रत करते हैं. ऐसे कई सवाल भी होते हैं कि व्रत में क्या खाया जाए और क्या नहीं?

    व्रत के दौरान अनाज, नमक, मांसाहार, शराब और लहसुन-प्याज वाली चीजें नहीं खायी जाती हैं, ये तो सभी जानते हैं पर क्या व्रत के दौरान चाय या कॉफी पी जा सकती है?

    क्या कहता है उपवास का नियम?
    इस सवाल का जवाब लोग अपनी सहूलियत के अनुसार देते हैं. कोई कहता है कि चाय पी सकते हैं पर कॉफी नहीं पीनी चाहिए जबकि कुछेक का कहना है कि दोनों का सेवन व्रत के दौरान किया जा सकता है. इसके पीछे तर्क यह है कि उपवास के नियमों को लेकर कहीं भी ऐसा कुछ नहीं लिखा है. हर व्यक्ति की अपनी एक व्यक्तिगत पसंद होती है. वेद-शास्त्रों में भी ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलाता है.

    कब से शुरू हुआ चाय-कॉफी का सेवन?
    व्रत त्योहार के नियम लोगों ने ही बनाएं. व्रत त्योहार का खान-पान एक परंपरा के अनुसार पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता आ रहा है. इसमें ही यह तय किया गया है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं. जिस तरह से स्थान विशेष के हिसाब से पूजन विधि अलग-अलग होती है वैसी ही खान-पान की भी है. नवरात्रि व्रत में मांसाहारी भोजन और अनाज का सेवन न करके व्रतधारी शरीर को शुद्ध करते हैं. तो इस दौरान चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थो का सेवन किया जाता है. वहीं सावन के व्रत में भी व्रतधारी चाय-कॉफी, ब्लैक टी, हर्बल टी पीना पसंद करते हैं.

    क्यों नहीं पीना चाहिए खाली पेट चाय-कॉफी?
    जबकि बेहतर होगा कि उपवास के दौरान किए जा रहे भोजन के सख्त प्रतिबंधों में चाय-कॉफी को भी शामिल करना चाहिए. इससे न केवल आध्यात्मिक शुद्धि और आत्म-सुधार होगा बल्कि सेहत भी सुधर सकती है. असल में, खाली पेट चाय-कॉफी का सेवन फ्री रेडिकल्स और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के साथ जल्दी बुढ़ापे को भी आमंत्रित करती है. इससे बचने के लिए आम दिनों में भी सुबह जागकर एकदम चाय-कॉफी पीने की जगह पानी पिया जा चाहिए. उसके आधे घंटे बाद ही चाय लें. ऐसा करने से नुकसान कम होगा.

    क्या नुकसान हो सकता है?
    उपवास के दौरान खाली पेट बार-बार चाय पीने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है. साधारण पत्ती वाली चाय की जगह हर्बल चाय पीना फायदा पहुंचा सकता है, लेकिन वह भी दो कप से ज्यादा न नहीं होना चाहिए. विभिन्‍न अध्‍ययन बताते हैं कि दूध से बनी चाय का सेवन आमाशय पर बुरा प्रभाव डालता है और पाचन क्रिया को क्षति पहुंचाता है. चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन दिल पर बुरा प्रभाव डालती है जिससे हृदय रोग होने की आशंका बढ़ जाती है. चाय में कैफीन तत्व 6 प्रतिशत मात्रा में होता है जो रक्त को दूषित होता है जिससे चर्म रोग होते हैं.

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