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    इस चाय की पत्ती होती है सफेद, कीमत हजारों में

    ज्यादातर लोगों के दिन की शुरुआत चाय के साथ होती है. कोई पत्तीवाली चाय तो कोई ग्रीन टी या हर्बल टी पीता है. चाय बनाना बहुत आसान भी होता है. वहीं इसकी पत्ती भी मार्केट में आसानी से मिल जाती है, यह सस्ती और महंगी भी मिलती है. हम-आप तो सस्ते में खरीद लेते हैं, लेकिन क्या आपने ऐसी चायपत्ती के बारे में सुना है जिसकी कीमत 10 हजार रुपये प्रति किलो हो?

    आपको बता दें इस तरह की चाय को सफेद चाय कहा जाता है. पूर्वोत्तर राज्य में इसका उत्पादन पायलेट प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा है. इस साल के शुरुआत में 95 साल पुराने गोलोकपुर टी एस्टेट ने 10 हजार प्रतिकिलो व्हाइट टी बेची थी. चाय की खुशबू और क्वॉलिटी की वजह से इसकी डिमांड बढ़ रही है. ऐसी चाय सफेद पत्तियों से तैयार की जाती है.

    एस्टेट के वाणिज्यिक प्रबंधक ने कहा कि इस साल 30 किलोग्राम व्हाइट टी का उत्पादन किया और उन्हें 10 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेंगलुरु के खुदरा विक्रेता टी बॉक्स को बेचा गया. इस किस्म की मांग लगातार बढ़ रही है. इस कारण हमने इसका उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है. हालांकि इसके उत्पादन में बहुत ध्यान देने की जरूरत होती है.

    बैंगनी टी की कीमत 24 हजार तक है
    व्हाइट टी से भी महंगी चाय अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले होती है. इसकी कीमत 24,501 रुपए किलो है. यह बैंगनी रंग की होती है. यह चाय पहले कीनिया में उगती थी. जिसे असम लाया गया फिर असम से अरुणाचल प्रदेश. यह चाय काफी अच्छी गुणवत्ता की मानी जाती है. जानकारों की माने तो यह चाय कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा सकती है. इसके अलावा हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां भी इस चाय के सेवन से दूर हो सकती है. इस चाय को घर में नहीं उगाया जा सकता, यह जंगलों में ही उगती है, दुनिया इसे वहीं से तोड़-तोड़ कर लाती है. पहले इसकी कीमत 15000 रुपये थी, लेकिन बीते दिनों से यह काफी महंगी हो गई.

    20 हजार प्रतिकिलो बिकती है दार्जिलिंग टी
    बैंगनी टी से थोड़ी सस्ती मिलती है दार्जिलिंग चायपत्ती. कीमत 19 हजार 3 सौ 63 है. यह मकईबारी टी एस्टेट में होती है जिसे पूरी से हाथ से बिना जाता है. एक प्राइवेट सेल में यह मकईबारी चायपत्ती प्रति किलो 302 डॉलर की दर से बिकी. सीजन के किसी भी टी प्लांट से पहली बिनाई वाली चायपत्तियों में किसी को इतना दाम नहीं मिला था.

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