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    व्रत में क्यों इस्तेमाल किया जाता है सेंधा नमक, जानें यहां

    खाने में नमक की बहुत अहम भूमिका होती है. नमक खाने का स्वाद बनाता भी है और इसे बिगाड़ता भी है. आयुर्वेद के अनुसार नमक पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मददगार है. बता दें कि आयुर्वेद में पांच तरह के नमक का जिक्र किया गया है. पहला समुद्र, रोमाका या सांभरा (यह गुजरात और राजस्थान के सांभर झील से निकलता है), तीसरा विदा (यह सांभरा नमक और आंवला चूर्ण को मिश्रण होता है), चौथा सौवर्चला लवण और पांचवा सेंधा नमक.

    आयुर्वेद में रोजाना सेंधा नमक को प्रयोग में लाने की बात कही गई है क्योंकि यह सबसे शुद्ध होता है और इसमें किसी भी तरह के कैमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

    व्रत के दौरान सेंधा नमक ही खाने-पीने में डाला जाता है. आमतौर पर व्रत में हल्की-फुल्की चीजें खाने की ही सलाह दी जाती है जिससे पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहे और ऐसे में बाकी के नमक की तुलना में सेंधा नमक शरीर को ठंडा रखने में बहुत मददगार होता है. इसमें सोडियम की मात्रा कम और पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है. फलस्वरूप यह ब्लड प्रेशर को भी सही बनाए रखता है.

    ये हैं सेंधा नमक के कई और फायदे:
    - सेंधा नमक आंखों के लिए बहुत अच्छा होता है.
    - यह ब्लड प्रेशर को तो कंट्रोल में रखता ही है.
    - इसमें आयरन , जिंक, मैग्नीशियम और कॉपर की मात्रा बहुत होती है.
    - यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाने मे मददगार साबित होता है.
    - सेंधा नमक का सेवन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है.
    - यह आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन से आवश्यक पोषक तत्व जैसे न्यूट्रिएंट्स और मिंरल्स को ग्रहण करने में शरीर की सहायता करता है.
    - शरीर में दिनभर एनर्जी बरकरार रखता है सेंधा नमक.

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