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    ऐसे मनाया जाता है उत्तरायण, बनते हैं ये खास पकवान

    मकर संक्रांति को गुजरात में लोग उत्तरायण के तौर पर मनाते है. यह गुजराती लोगों का प्रमुख त्योहार है. यह त्योहार सकराट की तरह दो दिनों यानी 14 ओर 15 तक चलता है. उत्तरायण शब्द उत्तर और अयन दो शब्दो से निकला है जिसका अर्थ है 'उत्तर में गमन'. इस दिन से दिन के समय सूर्य के उच्चतम बिंदु को यदि दैनिक तौर पर देखा जाए तो वह बिंदु हर दिन उत्तर की और बढ़ता हुआ दिखता है.

    पहला दिन 14 जनवरी को मनाया जाता है और इसे उत्तरायण कहा जाता है. उत्तरायण का दिन पतंग उड़ाने से  मनाया जाता है. राज्य भर में पतंगबाजी प्रतियोगिता आयोजित की जाती है और लोग पतंग की लड़ाई में शामिल होते हैं. पतंग की लड़ाई के दौरान "काई पो चे", "ई लापेट", "फ़िरकी वेट फ़िरकी" जैसे शब्द चिल्लाए जाते हैं.

    अगले दिन को वासी (अर्थात् बासी) उत्तरायण मनाया जाता है. इस दिन कई तरह के खास पकवान बनाए जाते हैं. उंधियू, तिल, मूंगफली और गुड़ से बनी चिक्की तो खूब बनाई जाती है.

    सबसे प्रमुख डिश जो इस खास दिन उत्तरायण पर बनाई जाती है वो है 'खिचड़ा'. ये खिचड़ी जैसा ही होता है बस इसमें चावल की जगह दालों के साथ गेहूं का इस्तेमाल किया जाता है. सौराष्ट्र में कई जगह मीठा खिचड़ा भी बनाया जाता है. मकर संक्रांति के दिन मीठा खिचड़ा तो राजस्थान में भी बनता है.

    खिचड़ा पचाने में थोड़ा समय लगता है इसलिए इसे सर्दियों में खाना ही सही रहता है. यह शरीर को भरपूर मात्रा में एनर्जी देता है. इनके अलावा जलेबी, शिंगोड़ा, जामफल. शेरडी, बोर जैसे फल भी खून खाए जाते हैं.
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