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    कब है ईद, क्यों मनाई जाती है और क्या-क्या बनता है खास?

    सऊदी अरब में मंगलवार को चांद दिख गया है. इसके अगले दिन यानी बुधवार को भारत में भी ईद मनाई जा सकती है. सऊदी अरब के बरेली हज सेवा समिति के सचिव हाजी शराफत खान ने जानकारी देते हुए बताया कि मदीने शरीफ़ में ईद के चांद का ऐलान मंगलवार को कर दिया गया है.

    आखिरी रोजे के बाद मीठी ईद मनाई जाएगी. हालांकि ये जरूरी नहीं की भारत में बुधवार को ही ईद मनाई जाए. क्योंकि ऐसा कर बार हो चुका है कि सऊदी के ऐलान के बाद भी भारत में दूसरे दिन ईद का त्योहार मनाया गया है. इस लिहाज से कहा जा सकता है कि ईद 5 या फिर 6 जून को मनाई जाएगी. इसका फैसला भारत में चांद देखने के बाद ही होगा.

    ईद के दिन मुस्लमान मस्जिद में जाकर नमाज अदा करते हैं. एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद (Eid Mubarak) देते हैं. घरों में लजीज पकवान बनेंगे और लोगों को दावत दी जाएगी. हर मुस्लिम घर में स्वादिष्ट किमामी सेवईं बनेगी. इसीलिए इस ईद को मीठी ईद कहा जाता है. आइए जानते हैं क्यों मनाई जाती है ईद और क्या है इसकी अहमियत.

    मीठी ईद या ईद उल-फितर (Eid Ul Fitr) को लेकर माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्ध में विजय हासिल की थी. इस जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया था, आगे चलकर इसी दिन को मीठी ईद या ईद उल-फितर के रूप में मनाया जाता है. जानकारों के मुताबिक पहली बार ईद उल-फितर 624 ईस्वी में मनाई गई थी.

    इस साल कब है मीठी ईद
    रमजान की आखिरी रात के चांद को देखकर यह तय किया जाता है कि ईद कब है. सऊदी अरब में चांद दिख गया और वहां 4 जून को ईद मनाई जाएगी. जबकि भारत में 5 या फिर 6 जून को ईद हो सकती है. रमजान महीने के 30 दिनों के रोजे के बाद जो ईद होती है उसे ईद-उल-फितर या मीठी ईद (Mithi Eid) कहा जाता है. कैसे मनाई जाती है मीठी ईद?
    ईद को किसी त्योहार से कम नहीं माना जाता है. ईद के दिन घरों में किमामी सेवइयां, शीर और दूध वाली सेवइयां बनाई जाती हैं. इसे लोग एक-दूसरे बांटकर मुंह मीठा कराते हैं. इस खास मौके पर बच्चों को ईदी या तोहफे दिए जाते हैं. सभी नए कपड़े पहनते हैं. रोजेदार मस्जिद जाकर ईद की नमाज अदा करते हैं. खुशहाली, चैन-ओ-अमन की दुआ मांगते हैं.

    दो ईद क्यों मनाई जाती है?
    इस्लाम धर्म में दो ईद मनाई जाती है. पहली मीठी ईद जिसे रमजान महीने की आखिरी रात के बाद मनाया जाता है. दूसरी, रमजान महीने के 70 दिन बाद होती है जिसे बकरीद कहते हैं. बकरा ईद (Bakra Eid) को कुर्रबानी की ईद माना जाता है. पहली मीठी ईद जिसे ईद उल-फितर कहा जाता है और दूसरी बकरी ईद को ईद उल-जुहा (Eid al-Adha) कहा जाता है.

     

    Photo- बिलाल एम जाफरी

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