जानिए क्या है हर दिल पसंद चाय का इतिहास
केंद्र में बतौर पीएम नरेंद्र मोदी को आज चार साल पूरे हो गए हैं. मोदी बचपन के दिनों में गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन के एक प्लैटफॉर्म पर चाय बेचते थे. चाय एक ऐसी चीज है जिससे हर किसी के दिन की शुरुआत ह
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दिशा-निर्देश
चाय की खोज का श्रेय 16वीं सदी में पुर्तगाली और चीनी व्यापारियों को जाता है. ब्रिटेन में यह 17वीं सदी तक आते-आते फेमस हुई और इसे पीना काफी पसंद किया जाने लगा. ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि ब्रिटिशों द्वारा ही भारत को चाय की पैदावार और इसके सेवन के बारे में पता चला. भारत के लिए यह चाय पर चीनी एकाधिकार के साथ प्रतिस्पर्धा करने जैसा बन गया था.
धीरे-धीरे चीन के बाद भारत चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया. भारत में असम में सबसे पहले 1806 में चाय की पैदावार की गई. भारत में असम की चाय और पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग की चाय बहुत मशहूर है. इसे असम में स्थानीय पेय का नाम भी मिला. ASSOCHAM की दिसंबर 2011 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत चाय के कुल उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत उपयोग करता है. इसके बावजूद भी भारत चीन के बाद चाय का सबसे बड़ा निर्यातक भी है. बता दें कि आज के समय में 70 प्रतिशत से भी ज्यादा चाय भारत में पी जाती है.
चाय तुलसी , इलायची, अदरक , काली मिर्च, मुलेठी, पुदीना आदि डालकर बनाए जाने लगी जिससे चाय का स्वाद तो बढ़ा ही साथ ही यह सेहतमंद भी रहा.
ये हैं बेहतरीन चाय बनाने के टिप्स:
- दूध और पानी बराबर मात्रा में लेना चाहिए.
- पहले तो पानी उबालते समय भी थोड़ा सा कद्दूकस किया हुआ अदरक डाल दें.
- फिर चीनी, चायपत्ती और दूध डालने के बाद भी एक उबाल आने के बाद थोड़ा सा अदरक और डालें.
- अदरक के साथ इलायची कूटकर डालने से चाय का स्वाद और भी बेहतर आता है.
- पर ध्यान रहे कि एक ही बर्तन में बार-बार चाय न बनाएं. दूध, चायपत्ती और अदरक के चिपके रहने से दोबारा बनी हुई चाय में जलने की महक आ सकती है.
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