वैसे तो हर माह पूर्णिमा होती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व कुछ और ही
है. इस बार शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर, दिन गुरुवार को है. हिंदू पुराणों के
अनुसार माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चांद पूरी सोलह कलाओं से
पूर्ण होता है. इस दिन चांदनी सबसे तेज प्रकाश वाली होती है.
विधि
वैसे तो हर माह पूर्णिमा होती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व कुछ और ही है. इस बार शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर, दिन गुरुवार को है. हिंदू पुराणों के अनुसार माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को चांद पूरी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है. इस दिन चांदनी सबसे तेज प्रकाश वाली होती है.
माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत गिरता है. ये किरणें सेहत के लिए काफी लाभदायक होती हैं. आइए जानिए शरद पूर्णिमा इतनी खास क्यों है. इस दिन क्या होता है और खीर खाने का क्या है महत्व.
ये हैं मान्यताएं-
- भगवान को खीर चढ़ाना.
- पूर्णिमा की चांद को खुली आंखों से नहीं देखना. खौलते दूध से भरे बर्तन में चांद देखते हैं.
- चन्द्रमा की रोशनी में सूई में धागा डालना.
- खीर,पोहा,मिठाई रात भर चांद के नीचे रखना.
- शरद पूर्णिमा का चांद बदलते मौसम अर्थात मानसून के अंत का भी प्रतीक है. इस दिन चांद धरती के सबसे निकट होता है इसलिए शरीर और मन दोनों को शीतलता प्रदान करता है. इसका चिकित्सकीय महत्व भी है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है. प्रत्येक प्रांत में शरद पूर्णिमा का कुछ न कुछ महत्व है. विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग भगवान को पूजा जाता है परंतु अधिकतर स्थानों में किसी न किसी रूप में देवी लक्ष्मी की पूजा अवश्य की जाती है.
शरद पूर्णिमा के दिन प्रात: काल स्नान करके आराध्य देव को सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करके आवाहन, आसान, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करना चाहिए. (एेसे बनाएं पंचामृत प्रसाद)
- रात्रि के समय गोदुग्ध (गाय के दूध) से बनी खीर में घी और चीनी मिलाकर अर्द्धरात्रि के समय भगवान को अर्पण (भोग लगाना) करना चाहिए.
- पूर्ण चंद्रमा के आकाश के मध्य स्थित होने पर उनका पूजन करना चाहिए तथा खीर का नैवेद्य अर्पण करके, रात को खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर दूसरे दिन उसका भोजन करना चाहिए तथा सबको उसका प्रसाद देना चाहिए.
(ऐसे बढ़ाएं खीर की मिठास)
क्यों लगाया जाता है खीर का भोग?
इस दिन व्रत रख कर विधिविधान से लक्ष्मीनारायण का पूजन किया जाता है. खीर बनाकर उसे रात में आसमान के नीचे रख दें ताकि चंद्रमा की चांदनी का प्रकाश खीर पर पड़े. दूसरे दिन सुबह स्नान करके खीर का भोग अपने आराध्य देवों को लगाएं. फिर अपने परिवार में खीर का प्रसाद बांटें. इस प्रसाद को ग्रहण करने से अनेक प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है.
क्या कहता है विज्ञान
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा हमारी धरती के बहुत करीब होता है. इसलिए चंद्रमा के प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे-सीधे धरती पर गिरते हैं. खाने-पीने की चीजें खुले आसमान के नीचे रखने से चंद्रमा की किरणे सीधे उन पर पड़ती हैं जिससे विशेष पोषक तत्व खाद्य पदार्थों में मिल जाते हैं जो हमारी सेहत के लिए अनुकूल होते हैं.
(इस तरीके से बनाए चावल की खीर)